Karva chauth 2020, करवा चौथ 2020

भारत देश में कई त्यौहार मनाये जाते है।उनमे से ही एक त्यौहार है करवाचौथ।जिसके बारे में हम इस आर्टिकल में बताने जा रहे है।करवा का मतलब होता है मिटटी से बना पात्र जिसके द्वारा ही जल का अपर्ण किया जाता है।इस दिन हर सुहागन स्त्री और जिनकी सगाई हो गयी हे, निर्जल व्रत रखकर अपनी पति की लम्बी उम्र की कामना करती है।जिसके लिए सुहागिन महिलाये कई दिनों पहले से ही तैयारी करने लग जाती है।आजकल महिलाओ को देखकर कई जगह पर उनके पति भी इस व्रत को रखने लग गए है और कई जगह कुवारी लड़किया भी अच्छे पति को पाने के लिए इस व्रत को करती है।

करवाचौथ का व्रत कहाँ और कब मनाया जाता है ?

करवा चौथ जिसे करकचतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है, पुरे भारत में बड़े हर्षो उल्लास से मनाया जाता है। पहले यह त्यौहार विशेषकर उत्तर भारत (दिल्ली,उत्तर प्रदेश, मदय प्रदेश, राजस्थान ) में बड़े धूम धाम से मनाया जाता था पर अब भारत के हर प्रान्त में मनाया जाता है।करवाचौथ का त्यौहार हर साल महिलाओं द्वारा कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को पूरे दिन निर्जल व्रत रखकर मनाया जाता है।यह हर साल अक्टूबर या नवंबर के महीने में, हिंदू कैलेंडर के अनुसार पूर्णिमा के चौथे दिन पडता है।इस साल प्यार और समपर्ण का प्रतिक करवा चौथ का व्रत 4 नवम्बर 2020 बुधवार को मनाया जायेगा।

चंद्र उदय का समय

इस बार सुहागिनों के लिए पूजा के मुहूर्त का शुभ समय 4 नवंबर को शाम 5.29 से 6.48 तक का है और चन्द्रमा के दर्शन रात को 8 बजकर 24 मिनट पर संभव है।

करवाचौथ की पौराणिक कथा या करवाचौथ का व्रत क्यों मनाया जाता है ?

हिंदू धर्म में करवा चौथ का बहुत महत्व बताया जाता है।पौराणिक कथाओ के अनुसार इसके पीछे सत्यवान और सावित्री की कहानी जुडी है।बताया जाता हे जब सत्यवान की मृत्यु हो गयी और सत्यवान की आत्मा को लेने जब यमराज आए तो पतिव्रता सावित्री के लिए इससे बड़ा ओर कोई दुख न था।सावित्री ने उनसे अपने पति सत्यवान के प्राणों की भीख मांगी और अपने सत्यवान को न ले जाने का निवेदन किया।यमराज के ना मानने पर वह अपने पति के मृत शरीर के पास विलाप करने लगी और अन्न और जल का त्याग कर दिया।इससे यमराज विचलित हो गए उन्होंने सावित्री को इसके अतिरिक्त ओर कुछ मांग लेने को बोला। सावित्री ने यमराज से कहा आप मुझे बहुत सारी संतान की मां बनने का आशीर्वाद दे दीजिये तो यमराज जी ने उनको वह आशीर्वाद दे दिया पर वह यह भूल गए की पतिव्रता स्त्री के लिए पति ही सबकुछ होता हे वह अपनी पति के अलावा किसी और बारे में सोच भी नहीं सकती है।अपने वचन के कारण यमराज जी सत्यवान के प्राण नहीं ले जा सके तब से सुहागिन महिलाये अन्न जल का त्याग करके अपने पति की लंबी उम्र, स्वास्थय और सुख समृद्धि के लिए करवाचौथ का व्रत रखती है।

एक ओर पौराणिक कथा के अनुसार जब अर्जुन नीलगिरी की पहाड़ियों में घोर तपस्या के लिए गए हुए थे तो बाकी चारों पांडवों पर भी कई प्रकार की समस्या आन पड़ी थी तब द्रोपदी ने भगवान श्री कृष्ण से मिलकर अपना दुख बतया और अपने पति की रक्षा के लिए उपाय पूछा भगवान श्री कृष्ण ने उनको कार्तिक कृष्ण चतुर्थी के दिन करवा चौथ का व्रत रखने की सलाह दी।जिस करने से अर्जुन भी सकुशल लौट आये और बाकी पांडव की समस्याए भी दूर हो गयी।इस कारण भी करवा चौथ का व्रत मनाया जाता है।

करवा चौथ की कथा

एक साहूकार के साथ पुत्र और एक पुत्री थी।आठो भाई बहन एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे, साथ खेलते और भोजन करते थे।बहिन की शादी हो गयी जब एक बार बहन मायके आई हुई थी तो वह करवा चौथ का दिन था और उस दिन साहूकार की पुत्री ने भी करवाचौथ का व्रत किया था।रोजाना की तरह सब काम चल रहे थे लेकिन अब साहूकार की पुत्री भूख प्यास से व्याकुल हो गई थी।जब शाम को भाई काम से घर लौटे तो उन्होंने अपनी बहन को भोजन करने के लिये बोला, बहन बोली आज करवा चौथ का व्रत है मैं चाँद निकलने और उसको अर्घ देने के बाद ही भोजन करूंगी तब भाइयों ने देखा की हमारी बहन भूख प्यास से व्याकुल है और चाँद निकलने में भी अभी टाइम है वो कब तक इंतजार करेगी तो वह अपनी बहिन की इस हालत को देखकर परेशान हुए और उन्होंने एक तरिकब सोची।सबसे छोटा भाई पीपल के पेड़ पर दिया जलाकर छलनी की ओट में रख देता वह ऐसा लगता हे जैसे मानो चतुर्थी की चाँद निकला हो।फिर वह अपनी बहिन को आकर बोलता है तेरा चांद निकल गया है।यह सुनकर बहन ख़ुश हो जाती है और चाँद को अर्घ दे देती है।

फिर भाइयो के साथ खाना खाने बैठ जाती है जैसे ही वह खाने का पहला निवाला डालती है तो उसमे बाल आता है जैसे ही वह दूसरा निवाला डालती है उसमें से पत्थर निकलता है उसके बाद जैसे ही वह तीसरा निवाला डालती है तो ससुराल से बुलावा आता है की उसका पति बीमार है उसे जल्दी से भेजो।तब माँ ने जैसे ही बक्से से साड़ी निकालने के लिए हाथ डाला तो उनके हाथ में सफ़ेद साड़ी आयी तब माँ ने एक सोने का सिक्का उसके पल्लू से बांध दिया और बोला जो भी तुझे रास्ते में मिले उसके पैर छूकर आशीर्वाद लेना और जो भी तुझे अमर सुहाग का आशीर्वाद दे उसे यह सिक्का दे देना उसने ऐसा ही किया जो भी रास्ते में दिखा उससे आशीर्वाद लिया पर किसी ने भी उसको सुहाग का आशीर्वाद नहीं दिया जब वह ससुराल पहुंची तो वह अपनी ननद के पैर छूती है और वह उसे आशीर्वाद देती है की सात पुत्रो की मां बनो और तुम्हें भाइयों का सुख मिले तब वह सोने का सिक्का निकालकर उसे दे देती है और जैसे ही वह अंदर जाती है तो उसकी साँस रो रही थी और बोली तेरा पति ऊपर मरा हुआ पड़ा है और वह अपने पति के शव के पास रोती रही और अपने पति का अंतिम संस्कार करने के लिए मना कर दिया।

वह अपने मरे हुए पति के साथ रहने लगी और उसकी सेवा करने लगी।हर रोज उसकी साँस ठंडी बांसी रोटी दासी के हाथ भिजवा देती थी।फिर थोड़े दिन बाद माघ की तिल चौथ आई और बोली करवो ले करवो ले, भाया की प्यारी करवो ले तब वह बोली की हे चौथ माता मेरी उजड़ी तो आप हे सुधारोगे, मेरे पति को आप ही जिंदा करोगे।मुझे मेरी गलती का पश्चाताप है मैं आपसे माफी मांगती हूं।तब चौथ माता बोली मेरे से बड़ी बैसाख की बैसाखी चौथ आएगी वह तुझे तेरा सुहाग देगी फिर बैसाखी चौथ आयी उसने कहा भाधवे की चौथ तुझे तेरा सुहाग देगी।तब कुछ महीने बाद भादुड़ी चौथ माता स्वर्ग से उतरी और वही सब बातें कहने लगी जो उसने बाकी सब से कही थी तब चौथ माता बोली की तेरे पर सबसे बड़ी कार्तिक की करवा चौथ माता नाराज है वही तेरा उद्धार कर सकती है।इसलिए जैसे ही वह आये तो उसके पैर पकड़ लेना वही तेरे सुहाग को जिन्दा कर सकती है।यदि तेने उसके पैर छोड़ दिए तो फिर कोई भी तेरे पति को जिन्दा नहीं कर सकता है।

कार्तिक का महीना आया स्वर्ग से चौथ उत्तरी और गुस्से से बोली भाइयो की बहिन करवा ले दिन में चाँद उगने वाली करवा ले तब साहूकार की बेटी ने उसके पैर पकड़ लिए और विलाप करने लगी और बोली हे चौथ माता मेरा सुहाग तेरा व्रत भंग करने कारण उजड़ा है।में नासमझ थी मुझे इतना बड़ा दंड मत दो। तब चौथ माता कहती है पापिनी हत्यारिणी मेरा पैर क्यों पकड़ रखा है।मेरा पैर छोड़ दे तब वह बोली है मेरी बिगड़ी हुई आपको बनानी पड़ेगी मुझे मेरा सुहाग देना हे पड़ेगा क्योकि आप जग की माता है।सबकी इच्छा पूरी करने वाली माता है।तब चौथ माता खुश हुई और आंखों में से काजल निकाला, नाखूनों में से मेहंदी, बिंदी में से रोली निकाली और सबसे छोटी अंगुली से उसके मरे हुए पति पर छींटे देते ही उसका पति जिंदा हो गया।

करवा चौथ की पूजन साम्रगी

अब करवा चौथ का व्रत पुरे भारत देश में मनाया जाता है।इसलिए हर प्रान्त की कुछ साम्रगी अलग-अलग हो सकती है।करवा चौथ की पूजन साम्रगी निम्न है –

मिट्टी की टोंटीदार करवा और ढक्कन, पानी का लौटा, गंगाजल, दीपक, रुई , लाल कपडा, अगरबत्ती, चन्दन, कुंकुम ,रोली अक्षत, फूल, कच्चा दूध, दही, देसी घी, चावल, मिठाई, चौकी, करवा चौथ व्रत कथा,शिव परिवार की फोटो, माँ करवा का फोटो, मेहन्दी, सिंदूर, कंघा, बिंदी, चुनरी, चूड़ी, बिछुवा, छलनी, आठ पूरी की अठावरी, हलुवा और दक्षिणा के पैसे।

करवा चौथ कैसे मनाया जाता है ?

सुहागिन महिलाएं वैसे तो कई व्रत रखती है पर यह व्रत पति की लंबी उम्र की कामना से संबंधित है इसलिए महिलाएं इस व्रत के लिए पहले से ही इसकी तैयारी करने लग जाती है।

सरगी क्या है ?

करवा चौथ के दिन महिलाएं सुबह सूर्योदय से पहले 4-5 बजे के आसपास उठकर सरगी खाती है यह विशेषकर पंजाब में प्रसिद्ध है।सरगी सांस या बुजुर्ग द्वारा अपनी बहु को दी जाने वाली भेट है।सरगी में भोजन के साथ कपडे और शृंगार भी दिया जाता है।भोजन और शृंगार देने का अपना अपना महत्व है।भोजन इसलिए दिया जाता है ताकि सारा दिन उपवास रखने के लिए ऊर्जा मिलती है और व्रत को अच्छे से पूरा किया जा सके।सामानयतया भोजन में मिठाई, मठरी, फल, ड्रायफ्रूट आदि दिया जाता है।कपड़े,गहने सौभागय का एहसास कराने के लिए दिए जाते हैं।

सरगी खाने के बाद फिर महिलाये दिन भर भूख और प्यास के रहती है।यह दिन महिलाओ के लिए बहुत खास दिन होता है, इसलिए इस दिन महिलाये, उन्हें जो कपड़े सबसे सुन्दर लगते है, उसे पहनती है, साथ ही चूड़ियां सिंदूर, मंगलसूत्र, बिंदी, आभूषण आदि पहनती है।जिसको पहनकर वह काफी सुंदर लगती है।

फिर शाम के समय में पार्वती, गणेश और करवा माता की प्रतिमा स्थापित की जाती है प्रतिमा स्थापित करने के बाद माता पार्वती को श्रृंगार और सुहाग की वस्तुए अर्पित की जाती है।इसके बाद पूरे तन मन धन से सभी की पूजा की जाती है और पति की लंबी उम्र की कामना की जाती है।सुहागिन महिलाएं व्रत के दौरान करवा चौथ की की कथा कहे या फिर सुने।

फिर रात को चंद्र उदय के बाद छलनी से चन्द्रमा को देखती है और उसको अर्घ देती है और जिंदगी भर आपका साथ बने रहे ,सातो जन्म मुझे आप ही मिलो ऐसी कामना करती है।फिर छलनी से ही अपने पति को देखती है।छलनी से इसलिए पति को देखा जाता है ताकि रिश्तो में पारदर्शिता बानी रहे और एक दूसरे को अच्छी तरह समझ सके।फिर पति और सभी बुजुर्गो का आशीर्वाद लेकर पति के हाथ से जल पीती है और साथ बैठकर खाना कहती है।

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